
चंडीगढ़। पंजाब में केंद्रीय कृषि कानूनों पर सियासी जंग जारी है। पंजाब विधानसभा में चार कृषि विधेयक सर्वसम्मति से तो पारित हो गए, लेकिन अब इस पर भी सियासी घमासान तेज हो गया है। शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच जुबानी जंग तेज को गया है। शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर फिर निशाना साधा है और उनसे चार सवाल पूछे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें पता है कि कैप्टन के पास इनका कोई जवाब नहीं है फिर भी हम उन्हें इनका जवाब देने के लिए 15 दिन का समय देते हैं। वह बताएं कि आपने किसानों के साथ धोखा क्यों किया और आप क्यों केंद्र के हाथों में खेल रहे हो।सुखबीर ने कहा कि ये मेरे सवाल नहीं है बल्कि आज हर कोई मुख्यमंत्री से यही पूछ रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने अभी तक एपीएमसी एक्ट 2017 को भी रद्द नहीं किया है जो केंद्रीय बिलों की कापी है।
कैप्टन बोले, सुखबीर मानसिक तौर पर निराश लग रहे
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सुखबीर सिंह बादल पर पलटवार किया। मुख्यमंत्री अमरिंदर ने कहा कि सुखबीर ने राजनीति हितों के कारण कृषि कानूनों पर यू टर्न लिया है। उनको किसानों के हितों से कोई लेना-देना नहीं है। कैप्टन ने सुखबीर के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि सुखबीर के बयानों से साफ है कि उन्हें राजनीति के बारे में कुछ भी पता नहीं है। भाजपा से मिलीभगत के आरोप पर कैप्टन ने कहा कि सुखबीर मानसिक तौर पर निराश नजर आ रहे हैं और इसी कारण ऐसे बेतुके बयान दे रहे हैं। ऐसी टिप्पणियों का एक तर्कपूर्ण स्पष्टीकरण यह है कि अकाली नेता और उसकी पार्टी पूरी तरह से गुमनामी में है, जिसे दूर-दूर तक कोई संभावना नजर नहीं आती।कैप्टन ने कहा, ‘राज्य के संशोधित बिलों का मकसद केंद्र के खेती कानूनों के किसानों पर विनाशकारी प्रभाव को खत्म करना है। मैंने विधानसभा में ही बता दिया था कि राज्यपाल और राष्ट्रपति बिलों पर अपनी सहमति दे भी सकते हैं और नहीं भी। दूसरी ओर सुखबीर बादल कह रहे हो कि मैं इमानदार नहीं हूं।’ उन्होंने सुखबीर से कहा कि आप अपना मन बना लो कि आपका और पार्टी का स्टैंड क्या है।





