
जालंधर/लुधियाना। पहले लॉकडाऊन और अब 1 अक्तूबर से कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के शुरू किए गए रेल रोको आंदोलन ने पंजाब के उद्योगों की कमर तोड़ दी है। जानकारी के मुताबिक उद्योगों का करीब 13 हजार करोड़ रुपए का माल लुधियाना के ड्राई पोर्ट और रेलवे ट्रैक पर खड़ी गाडिय़ों में फंसा हुआ है। औद्योगिक क्षेत्र के व्यापारी संगठनों का मानना है कि यदि सप्लाई चेन दीवाली से नहीं खुली तो पंजाब के उद्योगों का सारा बिजनैस राजस्थान और दिल्ली के उद्योगों को शिफ्ट हो जाएगा जिससे आने वाले समय में राज्य को 15 लाख करोड़ के राजस्व का नुक्सान हो सकता है। यही नहीं ट्रेनों की आवाजाही से सूबे में यूरिया की भी कमी हो गई है जिसका किसानों को खुद भी नुक्सान उठाना पड़ रहा है। माल के 20 हजार कंटेनर रेलवे पोर्ट पर फंसे कृषि कानूनों के खिलाफ किसान जत्थेबंदियों के रेल रोको आंदोलन ने राज्य की अर्थ व्यवस्था को हिला कर रख दिया है। हालांकि कैप्टन सरकार द्वारा कृषि कानूनों के खिलाफ बिल पास करने के बाद किसान जत्थेबंदियों ने मालगाड़ियों को चलाने के लिए रेलवे ट्रैक खाली कर दिए थे, लेकिन उसके बाद केंद्र सरकार ने ही पंजाब में मालगाडिय़ां चलाने से इंकार कर दिया था। रेलवे मंत्रालय इस बात पर अड़ा हुआ है कि राज्य सरकार पहले मालगाडिय़ां चलाने के लिए सुरक्षा की जिम्मेदारी ले। करीब एक माह से बंद हुई आवाजाही के कारण उद्योगों की हालत बहुत ही खराब होती चली जा रही है। नतीजन उद्योगों को उत्पादन के लिए कच्चा माल नहीं मिल रहा है और निर्यात करने वाला सामान 20 हजार कंटेनरों में रेलवे पोर्ट पर ही बंद पड़ा है।
ये उद्योग बर्बादी की कगार पर
रेल रोको आंदोलन से प्रभावित होने वाले उद्योगों में साइकिल, हौजरी, राइस प्रोसैसिंग, चमड़ा, इंजीनियरिंग का सामान, कपास, ट्रैक्टर के पुर्जे और हाथ से चलने वाले उपकरण उद्योग शामिल हैं। लुधियाना कस्टम्स हाऊस एजैंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश वर्मा के मुताबिक लगभग 4500 करोड़ रुपए का दूसरे देशों में निर्यात किए जाने वाला सामान या तो रेलवे स्टेशनों पर पड़ा है या फिर ट्रैक पर खड़ी मालगाडिय़ों में अटका पड़ा है। इसी तरह 7500 करोड़ रुपए का कच्चा माल लुधियाना के उद्योगों में नहीं पहुंच पा रहा है। इस कारण कई छोटे और बड़े उद्योगों में उत्पादन ठप्प होने की कगार पर है। वर्मा कहते हैं कि सरकार को इस समय रेल रोको आंदोलन से 300 करोड़ से अधिक का नुक्सान हो चुका है। ट्रेनों की आवाजाही के कारण पंजाब के उद्योगों का बिजनैस दूसरे राज्यों की ओर शिफ्ट हो रहा है।
साइकिल उद्योग संकट में
लॉकडाऊन की मार झेल चुके राज्य के साइकिल उद्योग पर भी किसानी आंदोलन के कारण संकट के बादल मंडरा रहे हैं। कोविड संकट ने हाई-एंड फिटनैस और मनोरंजन बाइक की मांग में एक बड़ा उछाल ला दिया है लेकिन रेल रोको आंदोलन इस उद्योग पर भी भारी पड़ रहा है। हीरो साइकिल और एवन साइकिल जैसे ब्रांड्स का हाई-एंड साइकिलों में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल अलॉय, रिम्स और गियर पार्ट्स दिल्ली, राजस्थान या अंबाला में फंसे हुए हैं। हीरो साइकिल के सी.एम.डी. पंकज मुंजाल का कहना है कि भारत विदेशों में बढ़ती साइकिल की मांग को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा था। एवन साइकिल्स के सी.एम.डी. ओंकार सिंह पाहवा का कहना है कि हमने ताइवान से आयात करना शुरू कर दिया है। हमारी इकाई और कुछ अन्य साइकिल इकाइयों का कच्चा माल चीन से भी आ रहा है। यह माल कंटेनर ट्रेनों के जरिए हम तक पहुंचता है, जो रास्ते में फंस गए हैं।कपड़ा और इंजीनियरिंग उद्योग एक माह से मालगाडिय़ां न चलने के कारण कपड़ा और इंजीनियरिंग उद्योग भी संकट में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक कच्चे माल की वजह से जहां छह कपड़ा उद्योगों का परिचालन बंद हो चुका है वहीं इंजीनियरिंग उद्योग में उत्पादन 20-30 प्रतिशत कम हो चुका है। लुधियाना हैंड टूल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एस.सी. रल्हन के मुताबिक कंटेनर कच्चे माल और तैयार माल ले जा रहे हैं जिसमें 6000 से 7000 करोड़ रुपए के धागे, स्टील, साइकिल पार्ट्स, हाथ उपकरण और अन्य सामान शामिल हैं। यह सभी कहीं न कहीं रेलवे पोर्ट्स पर फंसे हुए हैं। मालगाडिय़ों का परिचालन नहीं होने से हमें पहले ही 1500 से 2000 करोड़ रुपए का वित्तीय नुक्सान उठाना पड़ रहा है।





