
अमृतसर। बढ़ते प्रदूषण के प्रति जागरूक गुरुनगरी की जनता इस बार दिवाली पर ग्रीन पटाखे ही चलाने की ओर अग्रसर है। काराबोरियों ने भी इस बार ग्रीन पटाखों का स्टाक मंगवा रखा है। हालांकि ये पटाखे आम पटाखों से थोड़े महंगे जरूर होते हैं, लेकिन इनके फायदे काफी ज्यादा हैं। कारोबारियों का कहना है कि इस बार उन्होंने इनका कम ही स्टाक मंगवाया है, लेकिन अगर इस बार इनकी डिमांड ज्यादा रही तो हर बार वह ग्रीन पटाखों की ही ज्यादा स्टाक मंगवाएंगे। दरअसल, ग्रीन पटाखों में नुकसानदेह केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता। यह पटाखे तथा आतिशबाजी चलाने पर पर्यावरण भी प्रदूषित नहीं होता। कारोबारियों का मानना है कि सरकार की हिदायतों के मुताबिक ही उन्होंने इस बार सामान्य पटाखों के साथ-साथ ग्रीन पटाखों की बिक्री का मन बनाया है। न्यू अमृतसर में लगाए गए स्टाल द अमृतसर फायरवर्क्स एसोसिएशन के प्रधान हरीश धवन ने कहा कि प्रशासन ने दिवाली पर पटाखों की बिक्री करने के लिए ड्रा के जरिए दस लोगों के नाम निकाले। इन लोगों ने स्टाल के लिए इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को हजारों रुपये किराया भी भर दिया है। इसके बाद इन लोगों ने लाखों रुपये खर्च कर न्यू अमृतसर मार्केट में स्टाल भी लगा लिए। लाखों रुपयों के पटाखों के साथ कई लोगों ने ग्रीन पटाखों का भी स्टाक इकट्ठा किया है ताकि दिवाली वाले दिन उसकी बिक्री की जा सके।
ग्रीन पटाखों का भरपूर स्टाक है: सचदेवा
पटाखा कारोबारी हरिंदर सिंह सचदेवा का कहना है कि उनके पास केंद्र सरकार का एक्स्प्लोसिव एक्ट के तहत लाइसेंस है। इसके आधार पर उन्होंने कई माह पहले से ही दिवाली के लिए पटाखों की खरीद कर ली। उन्होंने पारंपरिक पटाखों और आतिशबाजी के साथ-साथ ग्रीन पटाखों का भी आर्डर किया था और डिलीवरी भी उन्हें हो चुकी है। अब तो बस इंतजार है दिवाली की।
शिवाकासी में बनने लगे ग्रीन पटाखे
पटाखा कारोबारी सरबजीत ¨सह गोल्डी ने बताया कि ग्रीन पटाखे स्वास्थ के लिए नुकसानदेह नहीं होते। इन्हें बनाने में खतरनाक कैमिकल इस्तेमाल नहीं किए जाते। ग्रीन पटाखे चलाने पर पर्यावरण पर भी इसका कोई असर नहीं होता। शिवाकासी की फैक्ट्रियों में भी अब ग्रीन पटाखे बड़े स्तर पर बनाए जाने लगे हैं। इस बार उन्होंने ट्रायल के तौर पर कुछ पटाखे मंगवाए हैं। अगर लोगों ने इसे पसंद किया तो अगली दिवाली से वह बड़ी मात्रा में ग्रीन पटाखों की बिक्री को प्रोत्साहित करेंगे।
इसलिए अच्छे हैं ग्रीन पटाखे
– इनकी आवाज अन्य पटाखों की तरह कानों को फोड़ने वाली नहीं होती
– ये पटाखे धूल को सोख लेते हैं और इनका उत्सर्जन लेवल काफी कम होता है।
– इनसे अन्य पटाखों के मुकाबले 50 फीसद कम प्रदूषण फैलता है
– इनसे निकलने वाला धुआं हानिकारक नहीं होता





