
चंडीगढ़। नव वर्ष 2021 में साल बदलने के साथ पूरे शहर की पावर सप्लाई और इससे जुड़ी व्यवस्था भी बदल जाएगी। प्राइवेट कंपनी पूरे शहर की बिजली सप्लाई व्यवस्था संभाल लेगी। इससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को टेकओवर कर लेगी। कंज्यूमर्स के लिए भी एकदम नया अनुभव होगा।अभी तक यूटी प्रशासन के तहत आने वाले बिजली विभाग से ही पावर सप्लाई मिल रही है। प्राइवेटाइजेशन करने की प्रक्रिया दिसंबर के आखिर तक पूरी हो जाएगी। जिससे पावर सप्लाई का सिस्टम ही बदल जाएगा। प्राइवेटाइजेशन के लिए बनाई गई इंपावरर्ड कमेटी ने बिजली विभाग के प्राइवेटाइजेशन करने के रिक्वेस्ट फोर प्रपोजल (आरएफपी) को मंजूरी दे दी है। जिसके बाद प्रशासन ने समय सीमा तय कर इसको प्राइवेट करने की प्रक्रिया पर काम शुरू कर दिया है।
जेईआरसी से ली जाएगी मंजूरी
आरएफपी फाइनल होने के बाद अब ज्वाइंट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (जेईआरसी) से इसकी मंजूरी ली जाएगी। प्राइवेट करने का प्रस्ताव जेईआरसी के पास भेजा जाएगा। दरअसल चंडीगढ़ बिजली विभाग इसी कमीशन के तहत काम करता है। प्रशासन आरएफपी मंजूरी होने के बाद अब डिपार्टमेंट को ट्रांसफर करने के लिए जेईआरसी को चिट्ठी लिखेगा। इस चिट्ठी पर जवाब आते ही ट्रांसफर शुरू हो जाएगा।
पहले प्रशासन बनाएगा कंपनी
प्राइवेट करने के लिए पहले एक कंपनी बनाई जाएगी। यह कंपनी पहले प्रशासन अपने स्तर पर बनाएगी। जो पावर डिपार्टमेंट की सभी असेट्स को अपने कब्जे में लेगी। इसमें सभी पावर सब स्टेशन और दूसरा इंफ्रास्ट्रक्चर और सामान शामिल है। इससे पहले पावर मिनिस्ट्री और ट्रांजेक्शन एडवाइजर से चर्चा के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू करने का फैसला लिया गया था। नवंबर के आखिर तक बिड डॉक्यूमेंट तैयार कर टेंडर निकल जाएगा। टेंडर में जो कंपनी बिड देकर चयनित होगी वह प्रशासन की कंपनी को टेकओवर कर लेगी। दिसंबर के आखिर तक यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। जनवरी से प्राइवेट कंपनी ही पावर सप्लाई देगी।
ट्रस्ट देखेगी पेंशन संबंधी दायित्व
डिपार्टमेंट के इंप्लाइज को प्राइवेट कंपनी में शिफ्ट किया जाएगा। प्रशासन ने एक ट्रस्ट बनाने का निर्णय भी लिया है। प्राइवेट कंपनी में शिफ्ट होने वाले सभी गवर्नमेंट इंप्लाइज के पेंशन संबंधी दायित्व यही ट्रस्ट प्रबंधन करेगी। कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखने के लिए यही ट्रस्ट काम करेगी। टेक्निकल से लेकर अन्य स्टाफ को कंपनी में शिफ्ट किया जाएगा। कंपनी बिडिंग के बाद फाइनल होगी। जबकि ट्रस्ट प्रशासन ही बना देगा। बिडर्स में कंपीटिशन बढ़ाने के लिए भी कई तरह के निर्णय इस मीटिंग में लिए गए।
मुनाफे में चल रहे डिपार्टमेंट को प्राइवेट किया जा रहा है। कर्मचारी इस फैसले से सहमत नहीं है। वह नवंबर के आखिर में सभी तरह के कामों को ठप करेंगे हड़ताल करेंगे। लगातार आंदोलन चलाया जाएगा।
गोपाल दत्त जोशी, जनरल सेक्रेटरी, यूटी पावरमैन यूनियन।





