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कोविड-19 से लगे झटके से जूझने के लिए रेलवे ने तैयार की योजना

जालंधर।  पहले कोरोना काल और अब किसान अंदोलन। वर्ष 2020 में जहां आम लोगों को बड़ा झटका लगा है वहीं सरकारी संस्थानों में भी इस समय के दौरान काफी नुक्सान उठाना पड़ा है। इस मामले में भारत सरकार का कमाऊ उपक्रम रेलवे भी पीछे नहीं रहा है।रेल सेवाओं पर कोविड-19 व किसान अंदोलन  के असर के कारण भारतीय रेलवे की यात्री सेवाओं से आमदनी पिछले साल की तुलना में 87 फीसदी घट गई, जबकि माल ढुलाई से आमदनी आठ फीसदी बढ़ी है।रेलवे ने अब वर्ष 2030 तक देश की कुल माल ढुलाई में अपना हिस्सा बढ़ाकर 45 फीसदी करने की योजना बनाई है। रेलवे का यह राजस्व उसकी मौजूदा हिस्सेदारी 27 फीसदी से 1.6 गुना अधिक होगा। यह लक्ष्य राष्ट्रीय रेल योजना के प्रारूप का हिस्सा है। रेलवे ने वर्ष 2030 के बाद सरप्लस राजस्व हासिल करने का लक्ष्य तय किया है। यह सरप्लस राजस्व भविष्य के पूंजीगत निवेश और अब तक हो चुके पूंजीगत निवेश के कर्ज को चुकाने के लिए पर्याप्त होगा। 

राष्ट्रीय रेल योजना
इस योजना में प्रस्ताव है कि अधिक ट्रेन चलाकर यात्री ट्रेनों में प्रतीक्षा सूची खत्म की जाएगी। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव ने संवाददाताओं को बताया, ‘हम मांग के आकलन के लिए आर्टिफिशल इंटैलीजेंसी का इस्तेमाल कर रहे हैं। हम यह मांग पूरी करने के लिए अधिक ट्रेन चलाना चाहेंगे। प्रतीक्षा सूची खत्म करने के लिए यात्री ट्रेनों की आवाजाही का मांग से तालमेल कायम किया जा सकता है। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि सभी यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिले।’उन्होंने कहा कि रेलवे के बुनियादी ढांचे को इस तरह से विकसित करेंगे कि क्षमता मांग से अधिक हो। हमें मांग से अधिक क्षमता विकसित करनी होगी। यह पिछले दो वर्षों की योजना के पीछे यह विचार है। राष्ट्रीय रेल योजना के अंतिम प्रारूप में यह दिखता है। इस पर एक महीने में राय आमंत्रित की गई हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा पहली बार हो रहा है कि भारतीय रेलवे की कारोबारी योजना और बुनियादी ढांचा विकास योजना की एक साथ योजना बनाई गई है और उन्हें एकल प्लेटफॉर्म पर विकसित किया गया है। यादव ने कहा कि भारत में वर्ष 2019 में 470 करोड़ टन माल की ढुलाई का अनुमान है, जिसमें भारतीय रेलवे ने 121 करोड़ टन की ढुलाई की। ऐसा अनुमान है कि वर्ष 2026 तक 640 करोड़ टन माल की ढुलाई होगी।’

वर्ष 2024 के लक्ष्य
राष्ट्रीय रेल योजना में लंबी अवधि के लक्ष्यों के अलावा विजन 2024 के तहत कुछ तात्कालिक लक्ष्य भी हैं। विजन 2024 का लक्ष्य रेल बुनियादी ढांचे को बढ़ाना है ताकि वर्ष 2024 तक 202.4 करोड़ टन माल की ढुलाई संभव हो सके। यादव के मुताबिक राष्ट्रीय रेल योजना में 2030 कर क्षमता सृजित करने का लक्ष्य है, जो वर्ष 2050 तक की मांग से अधिक होगी।

कोविड के बाद का दृश्य
यादव ने माल ढुलाई की मौजूदा स्थिति पर कहा कि 16 दिसंबर, 2020 तक कुल माल ढुलाई पिछले साल के स्तर के 97 फीसदी पर पहुंच चुकी है। रेल परिचालन सामान्य होने पर पूछे गए सवालों पर यादव ने कहा कि हम चरणबद्ध तरीके से धीरे-धीरे सामान्य की ओर बढ़ रहे हैं। हम कोविड-19 से संबंधित एहतियात बरतते हुए राज्यों के साथ तालमेल बैठा रहे हैं। लेकिन इस समय सभी ट्रेनों के परिचालन की एक निश्चित तिथि देना मुमकिन नहीं है।

Kranti Headline
Author: Kranti Headline

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