
जालंधर। पिछले 4 माह से पैंशन न मिलने के कारण 70 से 80 साल की आयु के 4 पैंशनर जब अपना ईलाज नहीं करवा पाए जिस कारण उनकी मौत हो गई। इस बात की जानकारी पंचायत समिति जिला परिषद पैंशनर यूनियन पंजाब के प्रधान राजविन्द्र सिंह तरसिक्का ने दी है। उन्होंने यूनियन की आयोजित बैठक में पहुंचे स्टेट बॉडी के पदाधिकारियों, जिलों के प्रधानों तथा महासचिवों को सम्बोधित करते हुए कहा कि सरकार द्वारा पैंशन न दिए जाने के कारण पैंशनरों में सरकार के प्रति भारी रोष पाया जा रहा है। एक तो महंगाई ने सभी की कमर तोड़ रखी है और ऊपर से सरकार बुजुर्गों की पैंशन नहीं दे रही है, जिसके चलते वह अपनी बीमारियों का ईलाज करवाने में असमर्थ हो गए हैं क्योंकि उनके बुढ़ापे का सहारा सिर्फ पैंशन ही होती हैै, वह भी बंद पड़ी हुई है। पंजाब प्रधान ने बताया कि वह पिछले 4-5 माह में पंजाब के ग्रामीण विकास व पंचायत मंत्री समेत विभाग के अन्य उच्चाधिकारियों को कई बार मिल चुके हैं और अक्सर एक ही जवाब होता है कि 5-6 दिन में ही उनके खातों में पैंशन आ जाएगी लेकिन आज 120 दिन बीत जाने पर भी पैंशन उनके बैंक खातों में नहीं आई। उन्होंने कहा कि साल 2020-21 में टैक्स के 130 करोड़ रुपए विभाग को मिले थे, में साल 2020-21 में सिर्फ 30 करोड़ रूपए ही पैंशन पर खर्च हुए हैं। बाकी पहले कंट्रोलर पंचायती राज ने गलत ढंग अपना कर खर्च कर दिए हैं। इस सबंधी पिछले कंट्रोलर पंचायती राज के खिलाफ जांच करवाई जाए। यूनियन के प्रैस व संयुक्त सचिव वेद प्रकाश खोसला, सुखदेव सिंह ढिल्लों, ओम प्रकाश सरपंच, सुरिन्द्र सिंह कैंथ, निर्मल सिंह, देवेन्द्र सिंह, बूटा राम, सुरजीत सिंह जस्सल, करनैल सिंह, सरदारा राम, कुलदीप सिंह, तरसेम चंद, प्रीतम सिंह, रणबीर सिंह भोगल, स्वरूप सिंह, शेर मोहम्मद, शिव कुमार, त्रिलोक सिंह व तरसेम चंद बैंस ने भी संयुक्त अपने सम्बोधन में सरकार से मांग की कि तुरंत उनकी बकाया पैंशन जारी की जाए। इसी दौरान एख और प्रस्ताव पारित कर चल रहे किसानों के संघर्ष का भी पैैंशनरों द्वारा समर्थन किया गया।





